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भारत में 4 करोड़ ग्रामीण लोग धातु-प्रदूषित पानी पीते हैं : सर्वे

भारत में 4 करोड़ ग्रामीण लोग धातु-प्रदूषित पानी पीते हैं : सर्वे





2019-02-22 : हाल ही में, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि भारत में लगभग 4 करोड़ ग्रामीण लोग धातु-प्रदूषित जल ग्रहण कर रहे हैं। यह लोग उस पानी को पीने के लिए मजबूर हैं जिसमें किसी न किसी रूप में धातु मिली हुई होती है। इस सर्वेक्षण में पाया गया कि प्रदूषित जल में पाए जाने वाली प्रमुख धातुएं फ्लोराइड, आर्सेनिक और नाइट्रेट हैं। धातु प्रदूषित जल के आंकड़ों में पश्चिम बंगाल और राजस्थान टॉप पर पाए गये हैं।

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में सबसे अधिक धातु से प्रदूषित पानी पीने वाला राज्य पश्चिम बंगाल है। यहां 39 प्रतिशत लोग इस जल का सेवन करने को मजबूर है। इसी क्रम में राजस्थान दूसरे स्थान पर आता है जहां 65 लाख ग्रामीण पीने के लिये प्रदूषित जल का प्रयोग करते हैं। इस जल से उनका उनका स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है, जबकि बिहार में 43 लाख लोग दूषित जल का सेवन कर रहे हैं।

इस सर्वेक्षण में जुटाए गये आंकड़ों में 16 राज्यों में एक लाख से अधिक ग्रामीण आबादी प्रभावित है। जबकि केवल सात राज्यों पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, पंजाब, असम, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा में 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। इसे अलग-अलग श्रेणी के अनुसार बांटते हुए कहा गया है कि फ्लोराइड प्रदूषण के क्षेत्र में 33 लाख, लवणता प्रदूषण के क्षेत्र में 25 लाख तथा नाइट्रेट प्रदूषण के क्षेत्र में 7 लाख आबादी के साथ राज्यों की सूची में राजस्थान टॉप पर है।

आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में लगभग 96 लाख लोग आर्सेनिक और 49 लाख लोग आयरन से प्रदूषित जल का सेवन कर रहे हैं। पीने के पानी में सबसे अधिक प्रकार की धातुएं पंजाब में पाई गईं। यहां सभी तरह की धातुओं को पानी में देखा गया जबकि पश्चिम बंगाल में नाइट्रेट की मिलावट नहीं मिली थी।

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