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ICCR ने स्वामी विवेकानंद के नाम पर 20 से अधिक सांस्कृतिक केंद्रों का नाम रखने की घोषणा की

ICCR ने स्वामी विवेकानंद के नाम पर 20 से अधिक सांस्कृतिक केंद्रों का नाम रखने की घोषणा की





2018-08-17 : दुनियाभर में भारतीय मिशनों में 20 से अधिक सांस्कृतिक केंद्रों का नाम स्वामी विवेकानंद के नाम पर रखा जायेगा। यह जानकारी भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने दी है। इस परियोजना के तहत बीजिंग में भारतीय दूतावास के भारतीय सांस्कृतिक केंद्र का नाम स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बदलकर स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र रखा गया। आईसीसीआर के अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने चीन में भारत के राजदूत गौतम बम्बावाले के साथ मिलकर इस केंद्र के नये नाम की पट्टिका का अनावरण किया। यह केंद्र योग, भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की मुफ्त कक्षाएं भी लगाता है। विदेश में जिन भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों का अबतक नामकरण नहीं हुआ, उनका नाम स्वामी विवेकानंद के नाम पर रखा जाएग। जिन केंद्रों का नाम किन्हीं अन्य भारतीय नेताओं के नाम पर है, उनका नाम नहीं बदला जाएगा।

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के बारे में :-

# भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद भारत सरकार का स्वतंत्र संगठन है।

# आईसीसीआर की स्थापना वर्ष 1950 में हुई थी। इस संस्था का मुख्यालय आजा भवन, नई दिल्ली में है।

# इस संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय बंगलौर, कलकत्ता, चंडीगढ़, चेन्नई, जकार्ता, मॉस्को, बर्लिन, कैरो, लंदन, ताशकंद, अलमाटी, जोहान्सबर्ग, डरबन, पोर्ट ऑफ़ स्पेन और कोलंबो में हैं।

# भारत तथा अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और पारस्परिक समझ स्थापित, पुनरूज्जीवित और उन्हें सुदृढ़ करने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् की स्थापना की गई थी।

स्वामी विवेकानन्द के बारे में :-

# स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था।

# उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में वर्ष 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था।

# भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा।

# उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे।

# कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली परिवार में जन्मे विवेकानंद आध्यात्मिकता की ओर झुके हुए थे। वे अपने गुरु रामकृष्ण देव से काफी प्रभावित थे जिनसे उन्होंने सीखा कि सारे जीव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार हैं।

# विवेकानंद ने रामकृष्ण की मृत्यु के बाद बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश भारत में मौजूदा स्थितियों का पहले हाथ ज्ञान हासिल किया। बाद में विश्व धर्म संसद 1893 में भारत का प्रतिनिधित्व करने, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कूच की। # भारत में, विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है और इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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