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डेनिस मुकवेगे तथा नादिया मुराद को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

डेनिस मुकवेगे तथा नादिया मुराद को मिला नोबेल शांति पुरस्कार





2018-10-06 : हाल ही में, नोबेल पुरस्कार चयन समिति ने 05 अक्टूबर 2018 को शांति क्षेत्र में कार्य करने के लिए डेनिस मुकवेगे तथा नादिया मुराद को पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की। पाठकों को बता दें कि इन दोनों ने यौन हिंसा को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल होने के खिलाफ प्रयास में अपना बड़ा योगदान दिया है। यह भी ध्यान दे की नादिया मुराद मलाला युसूफजई के बाद दूसरी सबसे कम उम्र की नोबेल पुरस्कार विजेता हैं। मलाला युसूफजई को वर्ष 2014 में 17 साल की उम्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

नादिया मुराद के बारे में :-

नादिया मुराद बसी ताहा का जन्म इराक के कोजो में 1993 में हुआ था। 25 साल की नादिया मुराद उन तीन हजार यजीदी लड़कियों में शामिल हैं, जिन्हें इस्लामिक स्टेट की कैद रहना पड़ा। आईएस के लोगों ने उन्हें हर तरह से प्रताड़ित किया। उन्होंने आईएस की कैद में तरह तरह के जुल्म झेले। जब वो किसी तरह वो वहां से बाहर आईं तो उन्होंने दुनिया को बताया कि इराक में यजीदी महिलाओं के साथ किस-किस तरह का जुल्म ढाया गया। साल 2016 में नादिया को यूरोपियन संघ का सखारोव मानवाधिकार सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। इसी साल नादिया को यूरोप के वेकलेव हावेल मानवाधिकार सम्मान से भी नवाजा गया था।

डेनिस मुकवेगे के बारे में :-

डेनिस मुकवेगे अफ्रीकी देश कांगो के गायनेकॉलॉजिस्ट हैं। उन्होंने सहयोगियों के साथ मिलकर कांगो में गैंगरेप की 30 हज़ार पीड़िताओं का इलाज किया है। इन महिलाओं के साथ वहां के बागियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। डेनिस को 2014 में यूरोपीय संसद का सखारोव पुरस्कार भी मिल चुका है। डेनिस मुकवेगे ने अपना पूरा जीवन युद्ध के दौरान यौन हिंसा की शिकार हुई पीड़ितों की सेवा में लगा दिया। डॉ. मुकवेगे और उनकी टीम अब तक कांगो के बुकाबू स्थित अपने अस्पताल में हजारों पीड़ितों का इलाज कर चुकी है। डॉ. मुकवेगे ने वर्ष 2008 में इस अस्पताल की स्थापना की थी। कांगो में लंबे समय तक चले गृहयुदध के दौरान साठ लाख से ज्यादा नागरिक प्रभावित हुए थे। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके डॉ। डेनिस मुकवेगे का कहना है कि न्याय पाना सभी का हक है।

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