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गंगा एवं यमुना को ‘जीवित’ का दर्जा दिए जाने का आदेश

गंगा एवं यमुना को ‘जीवित’ का दर्जा दिए जाने का आदेश





2017-03-21 : हाल ही में, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 20 मार्च 2017 को ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा कि देश की दो पवित्र नदियों गंगा ओैर यमुना को जीवित मानव का दर्जा दिया जाए। अदालत ने आदेश में कहा कि जिस प्रकार किसी मानव को हानि पहुँचाने पर सज़ा मुकर्रर की जाती है उसी प्रकार नदियों के लिए भी सोचा जाना चाहिए। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ द्वारा इस आदेश में गंगा और यमुना के साथ एक जीवित मानव की तरह व्यवहार किये जाने का आदेश दिया गया। इस मामले के अधिवक्ता एम सी पंत द्वारा इस संबंध में न्यूज़ीलैण्ड की वानकुई नदी के बारे में बताया गया जिसे मानव का दर्जा दिया गया है।

आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार है....

# इस मामले पर हरिद्वार निवासी मोहम्मद सलीम द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिसके बाद मामले पर अदालत ने आदेश दिया।

# अदालत द्वारा जिलाधिकारी को ढकरानी में गंगा की शक्ति नहर से अगले 72 घंटों में अतिक्रमण हटाने के आदेश भी दिए गये। अदालत ने यह भी कहा कि इसका अनुपालन न होने की स्थिति में उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा।

# अदालत ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच उत्तराखंड के अलग प्रदेश बनने के बाद से लंबित विभिन्न संपत्तियों के बंटवारे को भी सुलझाने के आदेश दिए।

# हाई कोर्ट ने सरकार को अदालत द्वारा दिसंबर 2016 में दिए गए आदेश के अनुसार अगले आठ सप्ताह के अंदर गंगा प्रबंधन बोर्ड गठित करने के भी निर्देश दिए।

# गंगा और यमुना को एक जीवित मानव की तरह का कानूनी दर्जा देते हुए अदालत ने नमामि गंगे मिशन के निदेशक, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और उत्तराखंड के महाधिवक्ता को नदियों के कानूनी अभिभावक होने के निर्देश दिए।

# इन अधिकारियों को गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों की सुरक्षा करने तथा उनके संरक्षण के लिये एक मानवीय चेहरे की तरह कार्य करने के लिए कहा गया।

# यह अधिकारी गंगा और यमुना के जीवित मानव का दर्जे को बरकरार रखने तथा इन नदियों के स्वास्थ्य और कुशलता को बढ़ावा देने के लिए बाध्य होंगे।

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