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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने डॉ एम वीरप्पा मोइली को सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया |

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने डॉ एम वीरप्पा मोइली को सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया |





0000-00-00 : हाल ही में भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 10 अगस्त 2015 को नई दिल्ली में संसद के सदस्य (लोकसभा) डॉ एम वीरप्पा मोइली को वर्ष 2014 के 24वें सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया | बता दे की डॉ. मोइली को यह सम्मान कन्नड़ में रचित उनके महाकाव्य "श्री रामायण महान्वैष्णम" के लिए दिया गया है | पाँच खंडों में विभाजित रामायण महान्वेषण कन्नड़ में वर्ष 2007 में प्रकाशित हुआ था | और बाद में कविता का अंग्रेजी, हिंदी, तेलुगु और तमिल में अनुवाद किया गया | भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर सी लाहोटी की अध्यक्षता में विद्वानों और लेखकों के 13 सदस्यीय पैनल ने मार्च 2015 में वीरप्पा मोइली के कन्नड महाकाव्य श्री रामायण महान्वेषण को वर्ष 2014 के 24वें सरस्वती सम्मान के लिए चुना |

मरपादी वीरप्पा मोइली के बारे में कुछ सामान्य बातें :-
# वह कर्नाटक से कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता है |
# वे वर्ष 1992 से 1994 के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे हैं |
# मोइली को पिछली यूपीए सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कारपोरेट मामलों, विधि और न्याय जैसे कई मंत्रालयों के वहन का दायित्व दिया गया था |
# वीरप्पा मोइली का जन्म 12 जनवरी 1940 को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिला में हुआ था |
# 75 वर्षीय मोइली कन्नड़ के एक प्रसिद्ध लेखक हैं. वे चार उपन्यास, कविता के तीन संग्रह, नाटकों और कई निबंध लिख चुके हैं |

सरस्वती सम्मान के बारे में :-
सरस्वती सम्मान भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट गद्य या कविता साहित्यिक कृतियों की मान्यता के लिए दिया जाता है. | और यह एक वार्षिक पुरस्कार है | तथा यह सम्मान पिछले 10 वर्षों की साहित्यिक कृतियों के लिए दिया जाता है | केके बिरला फाउंडेशन ने वर्ष 1991 में सरस्वती सम्मान की स्थापना की थी और पहला सम्मान डॉ. हरिवंश राय बच्चन को उनकी आत्मकथात्मक कृति "दशद्वार से सोपान तक" के लिए दिया गया था | सरस्वती सम्मान के अंतर्गत एक प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 10 लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित किया जाता है |

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