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एड्स (AIDS) संक्रमित के साथ कोई भी भेदभाव दंडनीय अपराध घोषित किया गया

एड्स (AIDS) संक्रमित के साथ कोई भी भेदभाव दंडनीय अपराध घोषित किया गया





2017-04-25 : एचआईवी व एड्स से संक्रमित रोगियों के साथ किया जाने वाला किसी प्रकार का भेदभाव पूर्ण व्यवहार दंडनीय अपराध घोषित किया गया। इसके लिए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने एक नए एक्ट को मंजूरी प्रदान कर दी। यह कानून एचआईवी व एड्स से संक्रमित रोगियों के अधिकारों की सुरक्षा की बात करता है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद इसे 11 अप्रैल को लोकसभा और 21 मार्च को राज्यसभा ने भी पारित कर दिया। अब एचआईवी व एड्स से संक्रमित व्यक्ति की पहचान का खुलासा हेतु अदालत के आदेश के बगैर संक्रमित व्यक्ति का नाम किसी को भी नहीं बताया जा सकता।

यह स्पष्ट आदेश है कि संक्रमित को ना ही नौकरी देने से वंचित रखा जा सकता। किसी भी प्रकार के एचआईवी व एड्स से संक्रमित रोगियों को काम से भी नहीं निकाला जा सकता। एचआईवी व एड्स से पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में भी उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता। सामान्य नागरिकों की तरह उन्हें भी संपत्ति, मकान और जमीन किराये पर देने और लेने का अधिकार है।

पाठकों को बता दे की यदि कोई व्यक्ति एचआईवी व एड्स से संक्रमित रोगियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार का दुष्प्रचार करता है तो उसे सजा के प्रावधान के तहत तीन माह से दो साल तक की कैद के साथ एक लाख तक का जुर्माना भरना पड़ सकता। नए नियम के तहत बीमा याजनाओं को लेकर भी कुछ बदलाव किये गए हैं। एचआईवी व एड्स से संक्रमित रोगियों के साथ संक्रमित की मंजूरी के बगैर ना ही उसकी एचआईवी जांच की जाएगी ना ही उसका उपचार ही किया जाएगा। इस एक्ट में सभी राज्यों को संक्रमण को फैलने से रोकने और इसके उपचार हेतु हरसंभव प्रयास के भी आदेश दिये गए हैं।

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