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बांग्लादेश में इस्लाम को राज्य धर्म के रूप में रखा|

बांग्लादेश में इस्लाम को राज्य धर्म के रूप में रखा|





2016-03-30 : हाल ही में, बांग्लादेश उच्चतम न्यायालय की उच्च न्यायालय खंड ने 28 मार्च 2016 को राज्य धर्मं के रूप में इस्लाम को बरक़रार रखते हुए एक धर्मनिरपेक्ष याचिका को खारिज कर दिया। उस याचिका में इस्लाम को राष्ट्र धर्म के रूप में मान्यता प्रदान करने वाले 1988 के संविधान संशोधन को चुनौती दी गई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति नईमा हैदर, न्यायमूर्ति काजी रेजाउल हक और न्यायमूर्ति अशरफ उल कमाल की पीठ ने पारित किया।

बांग्लादेश में 7 जून 1988 को आठवें संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद 15 जानेमाने लोगों ने राजकीय धर्म के प्रावधान को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका को पुनर्जीवित करते हुए उच्चतम न्यायालय के वकील समेंद्र नाथ गोस्वामी ने 1 अगस्त 2015 को उच्च न्यायालय खंड में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अनुसार, 1988 का संसोधन 2011 के संविधान संसोधन के विपरीत है जिसमे धर्मनिरपेक्षता को पुर्नजीवित करने पर बल दिया गया था। इस परिदृश्य में राज्य धर्म के रूप में इस्लाम को बनाए रखना विसंगत है।

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