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लोकसभा में निरस्त और संशोधन विधेयक 2014 पारित |

लोकसभा में निरस्त और संशोधन विधेयक 2014 पारित |





0000-00-00 : 18 मार्च 2015 को लोकसभा में ध्वनि मत से निरस्त और संशोधन विधेयक, 2014 पारित हो गया | बिल में आंशिक या पूर्णरूप से 35 पुरातन कानूनों को निरस्त करने का प्रयास किया गया है क्योंकि वे निष्प्रभावी और अप्रचलित हो गए थे | 35 अधिनियमों में से तीन कृत्यों को पूरी तरह से निरस्त कर दिया जाएगा | जिसमें भारतीय मत्स्य अधिनियम, 1897, विदेशी क्षेत्राधिकार अधिनियम,1947 और चीनी उपक्रम (प्रबंधन के ऊपर उठते हुए) अधिनियम,1978 शामिल हैं| शेष 32 मुख्य अधिनियमों में संशोधन किये जाने का प्रावधान है, जिसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम,1951; हिंदू विवाह अधिनियम,1955; आनंद विवाह अधिनियम,1909; भारतीय साक्ष्य अधिनियम,1872 और अन्य अधिनियम शामिल हैं | इससे पूर्व 8 दिसंबर,2014 को लोक सभा ने निरस्त और संशोधन (द्वितीय) विधेयक पारित किया जिसमें 90 कानूनों को निरस्त करने और दो कानूनों में संशोधन करने की मांग थी | 90 कानूनों में से 88 पूरी तरह से निरस्त किए जा चुके हैं | पृष्ठभूमि : केंद्र सरकार ने लोक सभा में 11 अगस्त, 2014 को इस विधेयक को पेश किया और 36 पुराने कानूनों को निरस्त करने मांग की | यह संसद में पारित नहीं किया गया और इसे 22 सितंबर, 2014 को डॉ. ई.एम. सुदर्शन नत्चिअप्पन (Natchiappan) की अध्यक्षता में संसदीय कार्मिक संबंधी स्थायी समिति, लोक शिकायत, विधि और न्याय के समक्ष भेजा गया था | स्थायी समिति ने मैनुअल मैला ढ़ोने और शुष्क शौचालयों का निर्माण (निषेध) अधिनियम,1993 को 36 कानूनों की सूची से जिसे निरस्त कर दिया जाना प्रस्तावित था से वापस लेने की सिफारिश की | समिति के अनुसार, मैनुअल मैला ढ़ोने के अधिनियम को निरस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि कई राज्य इसे रोजगार के रूप में जारी रखने के खिलाफ़ संकल्प पारित कर चुके थे | केंद्र सरकार के उद्देश्य में तेजी लाने के उद्देश से अपनी उपयोगिता खो चुके और अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने के लिए लोकसभा में निरस्त और संशोधन विधेयक,2014 पारित किया गया | देश में 1741 कानून निरर्थक हो चुके हैं लेकिन फिर भी वे अभी तक अस्तित्व में बने हुए हैं | इस संबंध में भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने 741 विनियोग अधिनियमों की पहचान की जिन्हें निरस्त कर दिए जाने की जरुरत है | ये कृत्य केंद्रीय वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं | रेल मंत्रालय ने मंत्रालय से सम्बंधित पुराने विनियोग अधिनियमों के सेट को निरस्त करने के लिए कानून मंत्रालय को अनुमति दे दी है ,वहीं वित्त मंत्रालय इस सन्दर्भ की प्रक्रिया में अपने कार्य में संलग्न है | 20वें विधि आयोग के अनुसार इन विनियोग अधिनियमों को निरस्त कर दिया जाना चाहिए क्योंकि ये विनियोग अधिनियम एक सीमित अवधि के लिए काम करते हैं | इसके बाद वे किसी भी अर्थ के नहीं रहकर मात्र तकनीकी रूप से क़ानून की किताबों में रहते हैं |

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